देर सै अन्धेर नहीं उस पणमेशर के घर में Der s andher nahi us panmeshvar ke ghar m

प्रिय दोस्त, आइये आज मेहर सिंह की एक शिक्षाप्रद रागनी पढ़ते है…

देर सै अन्धेर नहीं उस पणमेशर के घर में
चोर जार ठग बदमाशां कै तै जुत लागते सिर मैं।टेक

जिसा अन्न मिलै खाण नै उसा ही पी पाणी अडकारै
ये कष्ट कमाई कमा कमा कै कर्ज का मैल उतारै
ले कै कर्ज तू नाट ज्या तै बावले बांस उठज्या सारै
कर ले आत्मा साफ आबरू यो सच्चा कर्म उभारै
ना तै सदा तले नै आंख रहेंगी इस कर्जे के डर मैं।

छोड़ रास्ता कुराह चलैगी तै नहीं मजा लूटैगा
मोती बरगी आब तेरी नहीं धेला उठैगा
तेरे नेम धर्म जांगे छूट फिर तेरा भ्रम टूटैगा
पाप उदय हो और धर्म लोप जब तेरा घड़वा फूटैगा
फेर कहैगा या कूण बणी जिब आवैगा इस चक्र मैं।

उस का तनै ख्याल नहीं जिस की ले राखी सै साई
सोलहा आने तनै खो दिये तरे पल्लै ना एक पाई
झूठ तुफान निन्दा चुगली या तेरे पास कमाई
यहां भी तूं है और वहां भी तूं है इसा बण्या अन्याई
तूं ढ़ोकै डले चाल्या जागा इतनी बड़ी उम्र मैं।

कहै मेहर सिंह काम बड़ा हो नहीं चाम का प्यारा
मनुष्य जन्म का चोला ले तूं किस मतलब नै आरा
जिसां बोवैगा उसा खालेगा मीठा बो चाहे खारा
भरी भरी का तुरत फैसला दूध अलग जल न्यारा
कर्या नतीजा धर्या मिलैगा जब पहुचैंगा यम पुर मैं।

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