अक्सर हम अपने दांतों की देखभाल करते हैं परंतु हमें इसका सही ढंग नहीं आता है। हम ब्रश करके ही ये समझ लेते है की हमने अपने दांतों को सुरक्षित कर लिया है लेकिन ब्रश करने के बाद भी हमारे दांतों में बहुत सी जगह ऐसी रह जाती है जहाँ ब्रश नहीं पहुँच पाता और बीमारियाँ हमारे दांतों के पास ही मंडराती रहती है.


ब्रश करने के बाद भी एक तरीका बाकि रह जाता है जो हमारे दांतों की बहुत रक्षा करता है इसे फ्लॉसिंग कहते है आज इस पोस्ट के माध्यम से हम ये जानकारी प्राप्त करेंगे की फ्लॉसिंग के जरिए दांतों की देखभाल कैसे करें.
किसी रेशमी या नॉर्मल पतले धागे के जरिए दांतों को साफ करने की कला को फ्लॉसिंग कहा जाता है। इसके लिए धागे के दोनों छोर को दोनों हाथों से पकड़कर, दो दांतों के बीच में फंसाया जाता है, और हल्के से दांतों पर उपर से नीचे तक रगड़ा जाता है। इस तरीके से दांतों की जड़ों में जमी गंदगी साफ होती है, जिससे बैक्टीरिया नहीं पनपते है।

दांतों की सफाई के वक्त ब्रश भी दांतों की जड़ों में जमी गंदगी को साफ नहीं कर पाता। उपरी दांतों की सफाई करके हम छुपी हुई गंदगी को अनदेखा कर देते हैं। ऐसे में फ्लॉसिंग दांतों की अंदरूनी सफाई का एक बेहतर तरीका है।बाजार में फ्लॉसिंग के लिए अलग- अलग कंपनियों के फ्लॉसिंग टूथपिक उपलब्ध हैं, आप धागे की जगह उनका इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

कब करें फ्लॉसिंग – वैसे तो डॉक्टर्स दिन में एक बार फ्लॉसिंग की सलाह देते हैं, लेकिन यदि आपके पास पर्याप्त समय नहीं है तो आप सप्ताह में कम से कम तीन बार फ्लॉसिंग कर सकते हैं। हो सके तो इसके लिए रात का वक्त चुनें, ताकि आप पर्याप्त समय निकाल सकें। इसके जरिए आपके दांतों की सफाई ठीक तरह से हो जाती है। फ्लॉसिंग करते वक्त आपका सलीका कठोर नहीं होना चाहिए। अत्यधिक फ्लॉसिंग करने से भी बचें, क्योंकि इससे दांतों की पकड़ कमजोर हो सकती है।

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