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आइये जानते है की तारे क्यों टूटते हैं Aaiye jante hai ki taare kyo tutte hai

आइये जानते है की तारे क्यों टूटते हैं Aaiye jante hai ki taare kyo tutte hai, Let us know why break the stars.
प्रिय मित्र हम सब ने बचपन से लेकर आज तक ना जाने कितनी बार तारे टूटते हुए देखें होंगे लेकिन क्या आप जानते हो की क्या टूटने वाले वास्तव में तारे होते है, और ये टूटते क्यों है, आइये इसके बारे में जानकारी लेते है.

आकाश में दोनों गोलार्द्ध में तारों की संख्या लगभग 7500 है। नंगी आँखों से हमें केवल लगभग 3000 तारे ही दिखाई देते हैं। हम आकाश में टूटते हुए जो तारे देखते है असल में वो तारे होते ही नहीं, बल्कि छोटे छोटे आकाशीय पिंड होते हैं, जो पृथ्वी की तरह ही सूर्य के चारों और चक्कर लगाते रहते हैं, इन आकाशीय पिंडों को उल्का पिंड कहते हैं। यह पिंड पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर जाते हैं। यह पिंड पृथ्वी के वातावरण में इतनी तेज गति से नीचे की और बढ़ते हैं कि वायुमंडल के कणों से घर्षण के कारण जल जाते हैं। इनके जलने से आकाश में रोशनी की एक रेखा सी उत्पन्न होती है, इसी रोशनी को हम आम भाषा में टूटता तारा कहते हैं। यह उल्का पिंड केवल रात में ही नहीं पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करते हैं बल्कि दिन में भी प्रवेश करते हैं, लेकिन दिन में सूर्य की रोशनी के कारण यह हमें आकाश में जलते हुए नहीं दिखाई देते।

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