समझदार और संस्कारी बेटी Samajhdar aur sanskari Beti

समझदार और संस्कारी बेटी Samajhdar aur sanskari Beti, Intelligent and Civilized daughter.
राजेश भाई के घर में एक लड़की ने जन्म लिया. राजेश भाई लड़का या लड़की में कोई फर्क नहीं समझते है इसलिए वो बहुत खुश नजर आ रहे थे. उन्होंने लड़की का नाम “लक्ष्मी” रखा.

इसके बाद ना जाने क्यों राजेश भाई को दूसरी औलाद नसीब नहीं हुई लेकिन उसने कभी इस कमी को महशुश नहीं किया और अपनी बेटी लक्ष्मी की परवरिश में कोई कमी नहीं होने दी.
राजेश भाई कभी – कभी धुम्रपान और शराब का सेवन कर लिया करते थे जो उसकी पत्नी को अच्छा नहीं लगता था और उनमे झगड़ा हो जाता था. बेटी ये सब देखती रहती थी. लेकिन राजेश भाई यह सब मजाक कहकर निपटा दिया करते थे.
लक्ष्मी खूब समझदार और संस्कारी थी। अब लक्ष्मी पढाई के साथ – साथ बच्चो को ट्यूशन भी पढ़ाने लगी थी. वह सोचती थी की ऐसा करने से उसके पिता की मदद होगी. लेकिन राजेश भाई ने अपनी बेटी से पैसे नहीं लेना चाहा और उसे अपने पैसे अपने पास ही रखने के लिए कहा।
ग्रेजुएट करने के बाद लक्ष्मी नौकरी करने लगी और उसने अपने पास इकट्ठे हुए सारे पैसे बैंक में जमा करने शुरू कर दिए थे.
राजेश भाई जितना कमाते थे उससे उनके घर का खर्च आसानी से चल जाता था लेकिन अब लक्ष्मी की शादी भी करनी थी इसलिए उसने एक साहूकार से कर्ज की मांग की, साहूकार राजेश भाई के व्यवहार से परिचित था इसलिए झट से “हाँ” कर दी.
लक्ष्मी का रिश्ता एक अच्छे परिवार में तय कर दिया गया. लड़के वालो ने दहेज़ में कुछ भी लेने से इन्कार कर दिया.
समय को जाते कहाँ देर लगती है, शुभ दिन बारात आंगन में आयी, पंडितजी ने चंवरी मेँ विवाह विधि शुरु की।
फेरे फिरने का समय आया.
लक्ष्मी बोली – रुको पडिण्त जी। मुझे आप सब की उपस्तिथि मेँ मेरे पापा के साथ बात करनी है.
राजेश भाई चुपचाप सुन रहे थे.
लक्ष्मी ने कहा – पापा आप ने मुझे लाड – प्यार से बडा किया, पढाया, लिखाया खूब प्रेम दिया इसका कर्ज तो मैं चुका नहीं सकती.
लक्ष्मी ने एक बैंक चैक अपने पापा को देते हुए कहा – ये वो रूपये है जो मैंने अपनी पगार में से बचत की है, आप इन रुपयों से मेरी शादी के लिए लिया गया कर्ज चूका देना और जो बचे उन्हें अपने पास रखना ये आपके बुढ़ापे में काम आएगे. मैं नही चाहती कि आप को बुढापे में किसी के आगे हाथ फैलाना पडे! यह सब मैं मेरे पति और मेरे ससुर की सहमती में कर रही हूँ.
वहाँ पर उपस्थित सभी की नजर बेटी पर थी.
“पापा अब मैं आपसे जो दहेज में मांगू वो दोगे ?”
राजेश भाई भारी आवाज में बोले – “हां बेटा”.
लक्ष्मी बोली – “पापा मुझे वचन दो की आज के बाद कभी भी किसी भी नशे का सेवन नही करोगे”. मैं सब की मोजुदगी में दहेज में बस इतना ही मांगती हूँ।
लडकी का बाप मना कैसे करता? राजेश बोला – ” हाँ बेटी मैं वचन देता हूँ”.
दोस्तों अब तक आपने शादी मे लडकी की विदाई समय कन्या पक्ष को रोते देखा होगा लेकिन
आज तो बारातियो की आँखो में आँसुओ की धारा निकल चुकी थी।
मैं दूर से उस बेटी को “लक्ष्मी” रुप मे देख रहा था. और सोच रहा था की – “भ्रूण हत्या करने वाले लोगो को इस जैसी लक्ष्मी मिलेगी क्या”?
दोस्तों यदि राजेश ने भी लिंग जाँच करवाकर भ्रूण हत्या करवा दी होती तो क्या उसे ऐसी समझदार और संस्कारी बेटी मिली होती जो उसका बुढ़ापे का सहारा बनी.
दोस्तों जाने – अनजाने में यदि इस पोस्ट में मुझसे कोई गलती हुई हो तो मुझे कमेंट करके सूचित करने का कष्ट करें. 
धन्यवाद्

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