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कुछ सिक्के गिनते उसे देखा Kuchh sikke ginte use dekha

कुछ सिक्के गिनते उसे देखा Kuchh sikke ginte use dekha, Saw him a few coins count.

प्रिय दोस्त, वास्तविक ख़ुशी क्या होती है, इसका अहसास तब होता है जब हम किसी की मदद करते है. इसलिए जब भी मौका मिले किसी गरीब की मदद जरुर करे.

पटाखो कि दुकान से दूर हाथों मे,
कुछ सिक्के गिनते मैने उसे देखा…

एक गरीब बच्चे कि आखों मे,
मैने दिवाली को मरते देखा.

थी चाह उसे भी नए कपडे पहनने की…
पर उन्ही पूराने कपडो को मैने उसे साफ करते देखा.

हम करते है सदा अपने ग़मो कि नुमाईश…
उसे चूप-चाप ग़मो को पीते देखा.

थे नही माँ-बाप उसके..
उसे माँ का प्यार आैर पापा के हाथों की कमी मेहंसूस करते देखा.

जब मैने कहा, “बच्चे, क्या चहिये तुम्हे”?
तो चुप-चाप मुस्कुरा कर “ना” मे सिर हिलाते देखा.

थी वह उम्र बहुत छोटी अभी…
पर उसके अंदर मैने ज़मीर को पलते देखा

रात को सारे शहर कि दीपो कि लौ मे…
मैने उसके हसते, मगर बेबस चेहरें को देखा.

हम तो जीन्दा है अभी शान से यहा.
पर उसे जीते जी शान से मरते देखा.

नामकूल रही दिवाली मेरी…
जब मैने जि़दगी के इस दूसरे अजीब पहलु को देखा.

लोग कहते है, त्यौहार है जिंदगी में खुशियों के लिए,
तो क्यों मैने उसे मन ही मन घुटते और तरसते देखा ?

कुछ सिक्के गिनते मैने उसे देखा…

Please Help of the Poor Every day…….

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